क्या एक शिक्षित समाज का अर्थ केवल डिग्री और ऊँचे पद प्राप्त करना है? आज जब हम २१वीं सदी के भारत की बात करते हैं, तो एक तरफ हम चाँद पर पहुँचने का जश्न मनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे समाज का एक हिस्सा ‘पढ़े-लिखे’ होने के बावजूद अपनी ही कोख में पल रही नन्हीं जान का गला घोंट रहा है। पिछले कुछ दशकों में लगभग तीन करोड़ बेटियाँ इस दुनिया को देखने से पहले ही खामोश कर दी गईं।
यह ब्लॉग केवल एक लेख नहीं, बल्कि उन अनगिनत अजन्मे बच्चों की पुकार है जो जीना चाहते हैं। हम उस विडंबना पर विचार करेंगे जहाँ मंदिरों में देवी की पूजा तो की जाती है, पर उसी के साक्षात स्वरूप को संसार में आने से रोक दिया जाता है। ब्रह्मलीन संत स्वामी रामसुखदासजी महाराज के आध्यात्मिक विचारों से लेकर स्वाति “सरु” जैसलमेरिया के सामाजिक संकल्प तक, यह लेख हमें झकझोरने और यह सोचने पर मजबूर करता है कि यदि आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ रिश्तों के अभाव में कैसी ‘हाहाकार’ भरी सृष्टि देखेंगी।
आईये, कानून की शक्ति और मानवता के संकल्प के साथ इस ‘महापाप’ के विरुद्ध एक साझा प्रयास शुरू करें।

माँ मुझे बचा लो – “में जीना चाहती हूँ”
अजन्मा बच्चा हमारी तरह की सामान्य इंसान है, ऐसे में भ्रूण की हत्या एक महापाप है, विश्व भर में भारत ही एक ऐसा देश हैं, जहाँ महिलाओं को पूजा जाता, हम कन्या भ्रूण हत्या क्यों करते हैं या हमारा समाज इस और क्यों अग्रसर हैं सभी के लिए सोचने का विषय हैं? पिछले तीस-चालीस वर्षों में 3,00,00,000 (लगभग तीन करोड़) लड़कियों की गर्भ में हत्या हो चुकी हैं, क्या हम अनपढ़ हैं या हमारे पूर्वजों ने हमें विरासत में कन्या भ्रूण हत्या के लिए पाठ सिखाया है शायद ऐसा भी नहीं है। फिर क्यों? कन्या भ्रूण हत्या कौन कराता हैं? अशिक्षित आदिवासी आप गलत हैं, पढ़े लिखे समाज में फैलती ये कुरीति क्या हमें अपना आइना नहीं दिखाती? कन्याओं की भ्रूण में हत्या कराने वाले प्रोफेसर हैं, डॉ. हैं, इंजीनियर हैं, आई.ए.एस. हैं, हेल्थ डिपार्टमेन्ट के लोग हैं, सी ए हैं, काल सेंटर में काम करने वाले लोग हैं, मंदिरों में जिस देवी को पूजने जाते हैं उसी के स्वरूप को इस संसार में आने से पहले ही खत्म कर दिया जाता है वाह क्या सोच है हमारी? अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में न तो भुआ होगा और न ही मास्सी होगी। भाईओं को राखी कौन बांधेगा, बेटों के लिए बहू हैं कहाँ से लायेंगे विचार करने योग्य है। एक या दो बच्चों में सिमटता भारतीय परिवार पहले से ही रिश्तों का आभाव महसूस कर रहा है ऐसे में कन्या भ्रूण हत्या क्या ठीक हैं आओ विचार करें? सरकार ने इस समस्या को रोकने के लिए भ्रूण का लिंग परीक्षण करना अपराध घोषित किया है, प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण के दुरुपयोग को रोकने के लिए सन् 1994 में “प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक नियमन” और दुरुपयोग निवारण अधिनियम 1994 को 1 जनवरी 1996 को लागू किया इस कानून के अनुसार इस प्रकार का अपराध करने वाले लोगों को 5 वर्ष की सजा और 50,000 रुपये की सजा का प्रावधान किया गया है, यह राशि आरसीएच-2 कार्यक्रम मे अंतर्गत संबंधित जिले के मुख्या चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के माध्यम से दी जाएगी। भारतीय दंड संहिता की धारा 312 से लेकर 315 तक में भ्रूण हत्या रोकने सम्बन्धी विभिन्न प्रावधान किये गए हैं, धारा 315 शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी हत्या करने के आशय से किये गए कार्य के संबंध में सम्बंधित व्यक्ति को 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित करने का प्रावधान हैं, कन्या भ्रूण हत्या तो मानव के अधिकार कानून का उल्लंघन है साथ-साथ संविधान का अपमान भी है, ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। इसे रोकने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा और सरकार को कानून की कठोरता के साथ लागू करना होगा, पर्याप्त प्रचार-प्रसार करना होगा, लड़कियों की शिक्षा पर व्यापक ध्यान देने होंगे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके और यदि उनके ससुराल वाले कन्या भ्रूण हत्या करने को कहे तो वे उसका विरोध कर सके अंत में एक लड़की के शिक्षित होने से पूरा समाज शिक्षित होता हैं, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ यह पहल इसी फैसले की एक अहम कड़ी है। समाज में बदलाव हो रहा हैं, लोग जागरुक हो रहे हैं। लोगों को पता चल रहा हैं, कन्या भ्रूण हत्या के साईड-इफैक्ट से वे भी नहीं बचेंगे। आईये हम और आप संकल्प ले कि अगर देवी की पूजा न कर सकें तो कोई बात नहीं किन्तु किसी नन्हीं सी एंजेल के सर्वायिव करने के लिए, जिन्दा रहने के लिए, अपने अस्तित्व / वजूद को कायम रखने की लड़ाई में उसका कदम कदम पर सहयोग करेंगे, हम चाहे विश्व के जिस भी देश में हों, चाहे जिस भी राज्य में हो यह अपराध न तो करेंगे, न किसी को करने देंगे जरूरत पड़ने पर कानून की मदद लेंगे…. अपनी अंतिम सांसों तक।
एक प्रयास, “बेटियों बचाने का ….
स्वाति “सरु” जैसलमेरिया – सहप्रभारी (महिला)
गर्भपात है या विनाश ? जरा सोचिये !
(ब्रह्मलीन संत स्वामीजी रामसुखदासजी महाराज के प्रवचन से)
गर्भपात या भ्रूणहत्या हिन्दू-धर्म के भारतीय संस्कृति के सर्वथा विरुद्ध है। संसार का कोई भी श्रेष्ठ धर्म इस पाप को समर्थन नहीं देता और न ही दे सकता है। गर्भ में जीव निर्बल और असहाय अवस्था में रहता है। ऐसी अवस्था में उस निरपराध-निर्दोष शिशु की दर्दनाक हत्या कर देना कितना भंयकर पाप है? महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानन्द आदि का जन्म से पहले ही गर्भपात कर दिया होता तो देश की कितनी क्षति हुई होती। जन्म लेने से पहले ही उसकी हत्या कर देना कितना महान् पाप है। ऐसा महान् पाप करने वालों को घोर नरकों की भयंकर यातना भोगनी पड़ेगी।
अपील मुझे बचाओ ! मेरा क्या कसूर ?
बेटी को मार उजाड़ी माँ की कोख ..
वो भी इस डर से की ‘बेटी हुई तो क्या कहेंगे लोग…
श्री ही माता, श्री ही पत्नी, श्री ही है बहना…..
इसकी हत्या से खत्म संसार का गहना
लक्ष्मी का रूप यह हो देवी का सम्मान
भ्रूण हत्या करो ना मानव
ना करो नारी जाति का अपमान
भ्रूण हत्या (कन्यादान)
कन्यादान है महादान
इससे वंचित ना रहना तुम
माँ ना होती इस जंगल में
तो तू कहाँ से आता तू…
गर कन्या न हो कहीं
बहु कहाँ से लाओगे,
सृष्टि ही रुक जाएगी,
जब कन्याओं को मरवाओगे…
हत्या करना पाप जगत में…
ये शास्त्र का उल्लेख है
भ्रूण हत्या ना करो सज्जनों
ये विनाशिता की रेख हैं
युगों-युगों तक तड़फोगे
इस पाप को सहते सहते
मर जाओगे जब दुनियां से
पर पाप नहीं मिटेंगे तप से
भ्रूण हत्या ना करना मानव,
ये सृष्टि का श्रृंगार है
देवी स्वरूप कन्या की हत्या
बदले में हाहाकार है….


