राजस्थान के जोधपुर में सक्रिय ‘गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति’ वर्षों से अजन्मे बच्चों के अधिकारों और जीवन की सुरक्षा के लिए संघर्षरत है। समिति द्वारा साझा की गई यह अपील न केवल समाज की कुरीतियों पर प्रहार करती है, बल्कि हमें एक संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा भी देती है। आइए, इस संदेश को घर-घर पहुँचाएँ।

भ्रूण हत्या महा पाप, श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदासजी “गर्भ का बच्चा करें, पुकार मेरी मैया मुझे न मार”
हिन्दुस्तान जैसे देश में जहां हमारे धर्म शास्त्रों में जीवन मात्र की हत्या को महापाप माना गया है एवं अहिंसा परमोधर्म: मुख्य धारा माना गया है, लेकिन इस देश में हर साल हजारों गायें काटी जाती हैं व लाखों की संख्या में भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। ब्रह्मलीन स्वामी रामसुखदासजी अपने प्रवचनों में हमेशा कहते हैं कि इस देश में गाय को हम माता के रूप में मानते हैं, उनकी पूजा करते हैं। हजारों गायें हर माह कल्ल की जाती हैं, हत्या जैसे जघन्य अपराध किया जाता है। यह कितना बड़ा महापाप है। वे कहते थे कि माता के पेट में बच्चा होता है, उसकी भ्रूण हत्या की घटनाओं से दु:खी होकर यह कार्य हाथ में लिया एवं इसकी राजस्थान में लगभग 105 शाखाएँ इस कार्य को गति देने हेतु खोल दी। जो सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। हमें इस समिति से जुड़े हुए बहुत कम समय हुआ है, फिर भी हम देख रहे हैं कि जगह-जगह रैलियां करना वहां के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर विचार-विमर्श, रोकथाम के उपाय, सुझाव हर वर्ष वार्षिक सम्मेलन का आयोजन करना एवं तहसील मुख्यालयों पर, जहां-जहां इस समिति की शाखाएं खुली हुई हैं, रैलियां व कार्यक्रम आयोजित करना। बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यक्रम रखकर जानकारी देना। माननीय उच्च न्यायालय में भी जनहित याचिका के रूप में निवेदन कर राज्य सरकार को दिशा-निर्देश दिलाना आदि कार्य किये जा रहे हैं। राज्य सरकार को भी इसे रोकने के लिये कठोर नियम बनाने हेतु लिखा जाता है। इस जघन्य कार्य में सबसे ज्यादा भागीदारी डॉक्टरों की है। वे सोनोग्राफी करके बता देते हैं कि पेट में लड़का या लड़की है। इस पर माताएं भ्रूण हत्या हेतु तैयार हो जाती हैं।
आप देखते हैं व अखबारों में भी पढ़ते हैं कि कई बार झाड़ियों में व कई बार नालियों में नवजात शिशु पड़े मिलते हैं। यह कितनी विडम्बना है कि एक जिन्दा बच्चा जिसने अभी दुनिया देखी ही नहीं है उसे मरने के लिए झाड़ियों अथवा नालियों में फेंक दिया जाता है। आप सभी बुद्धिजीवी वर्ग एवं धार्मिक परम्परा के मनीषियों से निवेदन है कि इसे रोकने के लिए जो भी सार्थक प्रयास आप कर सकें, घर परिवार एवं समाज में अवश्य कर इस भारत मां की धरती को इस जघन्य पाप से बचावें। भ्रूण हत्याओं के कारण ही आज देश के किसी भी प्रान्त में लड़कियों का अनुपात लड़कों से कम होता हो रहा है एवं हर जाति वर्ग में विवाह सम्बन्ध में बहुत परेशानी होने जा रही है। फलत: लोग अर्न्तजातीय विवाह काफी संख्या में करने लग गये हैं। जिनकी न कोई जाति हैं न ही कोई परिवार का पता पता है। यदि यही स्थिति रही तो भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त हो जायेगी। अत: हमें इसे रोकने हेतु परिवार व समाज में जागृति लानी होगी। राज्य सरकार को भी चाहिये इसे रोकथाम हेतु कठोर नियम बनावें।
– पी.आर. पेडीवाल (अध्यक्ष)
Poem
अजन्मी कन्या की पुकार
(भ्रूण हत्या)
कोख की वो कन्या, उसे जन्म तो लेने दो
पुकार कर के कह रही, इस धरती पर आने दो
अपना न सको मुझे, क्या मैंने ऐसा पाप किया
दिखला न सको मुझे दुनियाँ, क्या मैंने गुनाह किया
मत करो अपराध ऐसा मुझको भी मुस्कुराने दो
पुकार कर के कह रही, इस धरती पर आने दो
स्वयं समझती हूँ बिन बोले तुम्हारे भावों की वाणी को
छंद वेश में छिपी असुरता की हर कुटिल कहानी को
सहज निष्कपट होकर मुझे खुश रह जाने दो
पुकार कर के कह रही, इस धरती पर आने दो
ऋषि के ये शब्द है, ऐसे धधकते अंगारे
जो मुझ अबला को मारे विकृत रूप वो धारे
रुढ़िवादी की झंझा में, मुझको न मर जाने दो
पुकार कर के कह रही, इस धरती पर आने दो…
भ्रूण हत्या एक अमानवीय कृत्य है, यह सिलसिला नहीं रुकेगा तो एक दिन मनुष्य के अस्तित्व का संकट खड़ा हो जायेगा। गर्भपात मातृ शक्ति का अपमान है, नारी जाति का अपमान है। नारी की पूर्णता माँ बनने में है, वह तो ममतामयी जननी है और ममता को सुरक्षित रखना नारी का प्रथम कर्त्तव्य है। माता कभी कुमाता नहीं होती, बल्कि साक्षात् देवी रूप शक्ति है। अत: इस महापाप से बचो और बचाओ।
स्वाति “सरू” जैसलमेरिया (लेखिका) स्वाति नक्षत्र ग्रुप, जोधपुर
Committee Members (निवेदक)
| Name | Position |
| पी.आर. पेड़ीवाल | अध्यक्ष जोधपुर महानगर |
| डॉ. पदमसिंह सांखला | वरिष्ठ उपाध्यक्ष |
| पवनकुमार शर्मा | उपाध्यक्ष |
| नन्दकिशोर भूतड़ा | मंत्री |
| गोपीकिशन लोहिया | सहमंत्री |
| महिपालसिंह | सलाहकार |
| डॉ. मानसिंह गहलोत | सलाहकार |
| रामेश्वरी भूतड़ा | प्रभारी (महिला) |
| डॉ. फूलकौर मून्दड़ा | सहप्रभारी (महिला) |
| आशा फोफलिया | सहप्रभारी (महिला) |
| स्वाति जैसलमेरिया | सहप्रभारी (महिला) |
| उमा बिड़ला | सहप्रभारी (महिला) |
| पं. बंशीलाल शर्मा | सदस्य |
| ओमप्रकाश लाहोटी | सदस्य |
| नीरज मून्दड़ा | सदस्य |


