हमारे बारे में


















गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति, भारत
प्रस्तावना
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति, भारत" की स्थापना वर्ष 1996 में इस संकल्प के साथ हुई कि भ्रूण हत्या जैसे महापाप को रोका जाए और हर गर्भस्थ शिशु को जीने का अधिकार मिले। संस्था का उद्देश्य समाज में यह चेतना फैलाना है कि बेटा-बेटी एक समान हैं और जीवन का सम्मान जन्म से पहले ही शुरू होता है।
हमारे उद्देश्य (Our Mission)
गर्भस्थ शिशु की रक्षा करना, भ्रूण हत्या रोकना, माताओं को सहयोग देना और समाज को इस पाप से मुक्त करना हमारा मिशन है।
हमारा दृष्टिकोण (Our Vision)
एक ऐसा समाज जहाँ भ्रूण हत्या पूरी तरह समाप्त हो, और हर शिशु—चाहे बेटा हो या बेटी—सम्मान और स्नेह के साथ स्वीकारा जाए।"
समाज में संस्कार निर्माण
समाज में संस्कार निर्माण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के चरित्र और समाज की दिशा तय करती है। इसके प्रमुख पहलुओं को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
परिवार की भूमिका: संस्कार निर्माण की पहली पाठशाला परिवार है। माता-पिता के आचरण और घर के वातावरण का बच्चों के मानस पटल पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
शिक्षा का महत्व: विद्यालय केवल किताबी ज्ञान के लिए नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों को सिखाने का भी केंद्र होना चाहिए। सही शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत के बीच भेद करना सिखाती है।
संगति का प्रभाव: कहा जाता है कि मनुष्य अपनी संगति से पहचाना जाता है। अच्छे मित्रों और सकारात्मक विचार वाले लोगों के साथ रहने से व्यक्ति में स्वतः ही अच्छे संस्कारों का विकास होता है।
सामाजिक उत्तरदायित्व: समाज के बड़े बुजुर्गों और प्रभावशाली व्यक्तियों का यह दायित्व है कि वे अपने व्यवहार से नई पीढ़ी के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करें।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव: अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ना व्यक्ति को विनम्र और अनुशासित बनाता है।
Registration Certificate
















